"अूसल (सिद्धांत) महज़ नियम नहीं होते, ये वो आतिशी (ज्वलंत) शब्द हैं जो अगर दिल में उतर जाएं तो इंसान को अकेला लश्कर (एक अकेले की सेना) बना देते हैं। जब एक आत्म-अभिमानी (स्वाभिमानी) मर्द अपने ज़मीर की सलीब उठाकर खड़ा होता है, तो ज़माना पहले उसका मज़ाक उड़ाता है, फिर कांपता है, और आखिरकार उसकी दहलीज़ पर सर झुका ही लेता है।" इसीलिए आप अपने उसूलों और नियमों पर पहाड़ की तरह जमे रहें, एक दिन लोग खुद ही लड़खड़ाते कदमों से आपकी ओर सरकने लगेंगे।
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