"अूसल (सिद्धांत) महज़ नियम नहीं होते, ये वो आतिशी (ज्वलंत) श...
Ummah Post
9 June, 2025

"अूसल (सिद्धांत) महज़ नियम नहीं होते, ये वो आतिशी (ज्वलंत) शब्द हैं जो अगर दिल में उतर जाएं तो इंसान को अकेला लश्कर (एक अकेले की सेना) बना देते हैं। जब एक आत्म-अभिमानी (स्वाभिमानी) मर्द अपने ज़मीर की सलीब उठाकर खड़ा होता है, तो ज़माना पहले उसका मज़ाक उड़ाता है, फिर कांपता है, और आखिरकार उसकी दहलीज़ पर सर झुका ही लेता है।" इसीलिए आप अपने उसूलों और नियमों पर पहाड़ की तरह जमे रहें, एक दिन लोग खुद ही लड़खड़ाते कदमों से आपकी ओर सरकने लगेंगे।

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कुत्तों के लिए कुर्बानी न कीजिए खुदारा...!! (ईद-उल-अज़हा की एक झकझोर देने वाली कहानी)
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कुत्तों के लिए कुर्बानी न कीजिए खुदारा...!! (ईद-उल-अज़हा की एक झकझोर देने वाली कहानी)

यह घटना एक मध्यमवर्गीय परिवार से जुड़ी है। एक पिता की दास्तान सुनिए जो कुर्बानी करने में असमर्थ है। "बाबा.... बाबा .... हमें भी गोश्त मिलेगा ना?" मैंने कहा: "हाँ-हाँ, क्यों नहीं, बिल्कुल मिलेगा।" "लेकिन बाबा ....पिछली ईद पर तो किसी ने भी हमें गोश्त नहीं दिया था, अब तो पूरा साल हो गया है गो...