हया (शर्म व हया) हमेशा खैर (भलाई) ही लाती है।

अबू हुरैरा...
Ummah Post
11 June, 2025

हया (शर्म व हया) हमेशा खैर (भलाई) ही लाती है।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि आप अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया:

"ईमान की सत्तर से ज़्यादा शाखाएँ (इक्शाम) हैं। और हया भी ईमान का एक हिस्सा है।"

— सहीह अल-बुख़ारी

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आख़िरी सफ़र की पुकार
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आख़िरी सफ़र की पुकार

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