अल्जीरिया से गाजा की नाकाबंदी (घेराबंदी) तोड़ने के लिए उठने वाला यह काफिला "काफिला-ए-सुमूद" (दृढ़ता का काफिला) सिर्फ गाड़ियों का काफिला नहीं है, यह उम्मत के ज़मीर की गूँज है।
अब तक इस काफिले में 80 देशों के ज़मीर वाले और साहसी लोग शामिल हो चुके हैं...
अल्जीरिया, ट्यूनीशिया और लीबिया से गुजरता हुआ, रफ़ाह बॉर्डर तक पहुँचने वाला हर कदम गाजा के मजलूमों (पीड़ितों) से वफ़ा के वादे का एलान है।
यह काफिला ज़ालिम नाकाबंदी को एक चुनौती और गाजा के लोगों को एक श्रद्धांजलि (नमन) है।
सलाम हो उन दिलों पर जो फिलिस्तीन के दर्द को अपना दर्द समझते हैं।
हालांकि, मिस्र का फिरौन उनकी राह में रोड़े अटकाने (बाधाएं खड़ी करने) के लिए कमर कसे हुए है।