हज़रत मुजद्दिद अलिफ़ सानी (रहमतुल्लाह अलैह) के एक ख़लीफ़ा ने...
Ummah Post
12 June, 2025

हज़रत मुजद्दिद अलिफ़ सानी (रहमतुल्लाह अलैह) के एक ख़लीफ़ा ने आपको ख़त लिखते हुए अपने इस्लाही (सुधारात्मक) और मिल्ली (राष्ट्रीय/सामुदायिक) कारनामे गिनाए, कि आज-कल मैं वाज़ (उपदेश) भी कह रहा हूँ, दरस-ओ-तदरीस (शिक्षण) भी कर रहा हूँ, तस्नीफ़-ओ-तालीफ़ (लेखन और संकलन) भी जारी है......... वगैरह वगैरह।

हज़रत ने जवाब में एक अजीब (अद्भुत) बात फ़रमाई, जो हम सबके लिए बेहद ध्यान देने योग्य है। फ़रमाया कि:

"मियाँ! यह सब तो तुम दूसरों का काम कर रहे हो? और इस तरह की ख़िदमात (सेवाएं) तो अल्लाह तआला 'रजुल-ए-फ़ाजिर' (एक पापी/दुराचारी व्यक्ति) से भी ले लेते हैं।

तुम तो यह बताओ कि तुम्हारे ज़ाती (व्यक्तिगत) आमाल (कर्म) और अहवाल (आध्यात्मिक स्थितियां) कैसे चल रहे हैं? तज़किया-ए-क़ल्ब (दिल की पाकीज़गी) और इस्लाह-ए-नफ़्स (आत्म-सुधार) का मामला कैसा है?"

हज़रत के इस मफ़हूम (विषय) को सामने रखते हुए अगर आज हम अपने हालात का जायज़ा लेते हैं, तो मामला बेहद नाज़ुक नज़र आता है।

क्योंकि जिस इल्म (ज्ञान) का मक़सद और महवर (केंद्र) अपनी फ़िक्र और इस्लाह के बजाय, सिर्फ़ दूसरों पर नज़र हो जाए, तो उसका मामला ख़तरनाक हो जाता है।

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वहदत-ए-दीन न कि वहदत-ए-अदयान (दीन की एकता, न कि धर्मों की एकता)
लेख

वहदत-ए-दीन न कि वहदत-ए-अदयान (दीन की एकता, न कि धर्मों की एकता)

🖋 मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रहमानी - शम्अ-ए-फ़रोज़ां 🕯 अल्लाह तआला ने हर चीज़ के लिए एक रास्ता बनाया है, इसी रास्ते से उस चीज़ को हासिल करने में इंसान की भलाई है और इस रास्ते को छोड़ देने में और अपनी तरफ़ से नए रास्ते बनाने में इंसान की बर्बादी है। अल्लाह तआला ने ग़िज़ा (भोजन) को पेट तक पहुँचान...