*ऐब देखना भी ऐब है*
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फ़ारस देश का राजा बहराम शिकार करने के लिए प्रसिद्ध था। एक दिन वह शिकार के लिए निकला तो उसे एक जंगली गधा दिखाई दिया। वह उसके पीछे भागा यहाँ तक कि राजा अपने लश्कर (सेना) से अलग हो गया। लेकिन वह शिकार पकड़ने में सफल रहा। शिकार को ज़बह करने के लिए वह अपने घोड़े से उतरा तो उसने एक चरवाहे को जंगल से आते हुए देखा।
राजा ने कहा:
*या राई अमसिक फ़रसी हाज़ा हत्ता अज़बहा हाज़ल हिमारा फ़म सकाहू सुम्मा तशागला बिज़ब्हिल हिमार*
"ऐ चरवाहे, तू मेरा घोड़ा पकड़ मैं इस गधे को ज़बह करूँ।" चुनाँचे उसने घोड़ा पकड़ा और राजा गधे को ज़बह करने में व्यस्त हो गया।
लेकिन राजा बहराम ने घोड़े पर भी नज़र रखी तो देखा कि चरवाहा:
*यक़्तओ जौहरतन फ़ी उज़रा फ़रसिही*
"उस घोड़े के गले से मोती काट रहा है।"
तो बहराम ने इस पर चश्मपोशी करते हुए (अनदेखा करते हुए) अपना ध्यान दूसरी तरफ़ कर लिया यहाँ तक कि चरवाहे ने मोती काट लिया।
राजा बहराम ने कहा:
*इन्नन नज़रा इलल ऐबि मिनल ऐबि सुम्मा रकिबा फ़रसहू व लहिक़ा बिअस्करिही*
"ऐब (दोष) की तरफ़ देखना भी ऐब है।" फिर वह अपने घोड़े पर सवार हुआ और अपने लश्कर से जा मिला। राजा से उसके वज़ीर ने पूछा:
*अय्युहल मलिकु ऐना जौहरतु उज़रा फ़रसिका फ़तबस्स मल मलिकु सुम्मा क़ाला अख़ज़हा मन ला यरुद्दुहा व अब्सरा मन ला यनमु अलैहि*
"ऐ राजा बहराम: आपके घोड़े के गले का मोती कहाँ है?"
राजा ने मुस्कुराकर कहा: "जिसने मोती लिया है वह वापस नहीं करेगा, और जिसने उसे देखा है वह भी उसका नाम नहीं लेगा (उसे उजागर नहीं करेगा)। और तुममें से जो कोई वह मोती किसी के पास देखे, वह उससे झगड़ा न करे।"
*(हिकायात-ए-क़ल्यूबी)*
ऐबों को ढूँढती है ऐब-जू की नज़र,
जो ख़ुश-नज़र हैं वो कमाल-ओ-हुनर देखते हैं।