"दुआएं ज़रूर फ़ायदा पहुँचाती हैं, मगर उन्हीं को फ़ायदा पहुँचाती हैं जो अज़्म-ओ-हिम्मत (संकल्प और साहस) रखते हैं; बे-हिम्मतों (कमज़ोर हौसले वालों) के लिए तो वे तर्क-ए-अमल (कर्म छोड़ देने) का हीला (बहाना) बन जाती हैं।"
— मौलाना अबुल कलाम आज़ाद
[गुबार-ए-ख़ातिर, पृष्ठ: 149]