"ऐ नफ़्स-ए-बेरहम (हे निर्दयी मन)! ज़िंदगी का एक और साल बीत ग...
Ummah Post
15 June, 2025

"ऐ नफ़्स-ए-बेरहम (हे निर्दयी मन)! ज़िंदगी का एक और साल बीत गया, तूने कब मुझे अपनी क़ैद से रिहाई देनी है।"

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खौफ-ए-इलाही (अल्लाह का डर) भी मारिफत (पहचान) का नतीजा है!!
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खौफ-ए-इलाही (अल्लाह का डर) भी मारिफत (पहचान) का नतीजा है!!

इमाम जलालुद्दीन रूमी (रह.) ने लिखा है कि एक आदमी सफर पर निकला। वह एक जंगल में चलता रहा और बहुत दूर चलने के बाद उसे भारी थकान महसूस हुई, जिसके कारण उस पर नींद हावी हो गई। उसने सोचा कि कहीं आराम कर ले; लेकिन सिर्फ इसलिए हिम्मत नहीं हुई क्योंकि वह जंगल का रास्ता था। उसने सोचा, "जंगल के रास्ते में भला क...