*आख़िरी मुलाक़ात*
जब मुल्ला नसीरुद्दीन का आख़िरी वक़्त आया और उन्हें अपने बचने की उम्मीद न रही, तो उन्होंने तमाम दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने से इंकार कर दिया। इसी दौरान एक ऐसा दोस्त उनसे मिलने आया जो नमाज़-रोज़े का पाबंद नहीं था।
मुल्ला ने उसे फ़ौरन अंदर बुला लिया। उसने हैरत से पूछा: "मुल्ला साहब! आपने दूसरे लोगों से तो मिलने से इंकार कर दिया, मगर मुझसे मिलना क्यों पसंद फ़रमाया?" मुल्ला साहब बोले: "मुझे यक़ीन है कि मैं उन सब लोगों से जन्नत में मुलाक़ात करूँगा, लेकिन आपके साथ मेरी यह आख़िरी मुलाक़ात है।"