किसी दार्शनिक (फिलासफर) से पूछा गया कि वह अपनी पत्नी का चयन कैसे करेगा?
दार्शनिक ने उत्तर दिया:
न बहुत खूबसूरत हो कि दूसरों की नज़र उस पर पड़े, न बदसूरत कि मेरी अपनी तबीयत उससे बेज़ार (परेशान) हो जाए।
न बहुत लंबी हो कि मुझे अपनी गर्दन ऊंची करनी पड़े, न बहुत छोटी कि मुझे सिर झुकाना पड़े।
न बहुत मोटी हो कि हवा के रास्ते में रुकावट बने, न बहुत दुबली कि वह सिर्फ एक साया (परछाई) महसूस हो।
न बहुत गोरी (सफ़ेद) हो कि मोम जैसी लगे, न बहुत काली कि साया दिखाई दे।
न जाहिल (अज्ञानी) हो कि बात समझाना मुश्किल हो, न बहुत ज्ञानी कि हर वक़्त बहस करे।
न बहुत मालदार हो कि कहे "यह मेरा माल है", न बहुत ग़रीब कि मेरे बच्चे मुश्किल में पड़ जाएं।
न ग़ुस्से वाली हो कि उसे मनाना मुश्किल हो, न हर वक़्त मांग (मुतालबा) करने वाली हो।
न चीखने वाली हो कि उसकी आवाज़ से कान के पर्दे फट जाएं, न इतनी ख़ामोश कि बिल्कुल कोई आवाज़ ही न हो।
कहा जाता है कि यह दार्शनिक आख़िरकार कुंवारा ही मर गया! 😭🤣😂🤣