फ़िक्र-ए-माश (रोज़ी-रोटी की चिंता) ने सभी जज़बों को सर्द कर दिया,
सड़कों पे दिन गुज़र गया हो के निढाल घर गए।
तन्दी-ए-सैल-ए-वक़्त (वक़्त के तेज़ बहाव) में यह भी है कोई ज़िंदगी,
सुबह हुई तो जी उठे, रात हुई तो मर गए।
— हज़ीं लुधियानवी
फ़िक्र-ए-माश (रोज़ी-रोटी की चिंता) ने सभी जज़बों को सर्द कर दिया,
सड़कों पे दिन गुज़र गया हो के निढाल घर गए।
तन्दी-ए-सैल-ए-वक़्त (वक़्त के तेज़ बहाव) में यह भी है कोई ज़िंदगी,
सुबह हुई तो जी उठे, रात हुई तो मर गए।
— हज़ीं लुधियानवी