"मैं अपने आप में इतना खो गया कि मालूम न रहा कहाँ जा कर प्रकट...
Ummah Post
16 June, 2025

"मैं अपने आप में इतना खो गया कि मालूम न रहा कहाँ जा कर प्रकट (ज़ाहिर) हुआ।

मैं दरिया (नदी/समुद्र) से एक बूँद था, मगर उसी दरिया में डूब कर खुद दरिया बन गया।"

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माल्टा के घाव: हज़रत शैखुल हिंद की महान क़ुर्बानियां और अटूट ईमान
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माल्टा के घाव: हज़रत शैखुल हिंद की महान क़ुर्बानियां और अटूट ईमान

हज़रत शैखुल हिंद को दीन (धर्म) के लिए बड़ी क़ुर्बानियां देनी पड़ीं। उनके हालात-ए-ज़िंदगी (जीवनी) में लिखा है कि जब उनका देहांत हकीम मोहम्मद अजमल की कोठी पर हुआ, तो ग़ुस्ल (अंतिम स्नान) देने वाले ने देखा कि उनकी पीठ पर ज़ख़्मों के बड़े-बड़े निशान हैं। उसने रिश्तेदारों से पूछा, उन्होंने घर वालों से पू...