*हुस्न-ए-ज़न्न (अच्छा गुमान) रखें!*
"क़ियामत के दिन किसी के बारे में हुस्न-ए-ज़न्न (अच्छा विचार/गुमान) रखने पर कोई दलील (प्रमाण) नहीं मांगी जाएगी, बल्कि किसी के बारे में बदज़न्न (बुरा विचार) हो जाने पर क़ियामत के दिन दलील की पूछताछ होगी। इसलिए हमेशा एक-दूसरे के बारे में अच्छा गुमान रखें!"
— हज़रत मौलाना मुबारक साहब (दामत बरकातुहुम)