लफ़्ज़ तासीर (असर) से बनते हैं, तलफ़्फ़ुज़ (उच्चारण) से नहीं...
Ummah Post
25 June, 2025

लफ़्ज़ तासीर (असर) से बनते हैं, तलफ़्फ़ुज़ (उच्चारण) से नहीं;

अहल-ए-दिल (दिल वाले) आज भी हैं अहल-ए-ज़बाँ (भाषा के जानकारों) से आगे।

💝💫💯

Share this article
होने वाले शौहर का इम्तिहान: एक ईमान अफ़रोज़ वाक़या
लेख

होने वाले शौहर का इम्तिहान: एक ईमान अफ़रोज़ वाक़या

मेरे भाई ने मुझे अपने एक दोस्त से सुना हुआ सच्चा वाक़या सुनाया, जो मैं अपनी बहनों के लिए बतौरी नसीहत (सीख के रूप में) पेश कर रहा हूँ। मेरे एक अज़ीज़ (रिश्तेदार) पैरिस में काफ़ी समय से रह रहे हैं। वह अच्छे रोज़गार पर हैं, मगर अभी तक किसी वजह से अपना घर नहीं बसा सके थे। एक दिन वह मेरे पास आए और घर बसा...