*मदरसों के छात्रों के नाम 🤭*
जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है,
यह सालाना इम्तिहान (वार्षिक परीक्षा) है, तमाशा नहीं है...
ग़ौर कर क़ुदूरी, जामी, शरह विक़ाया (मदरसे की किताबें) पर,
इम्तिहान कर देगा तेरा बिल्कुल सफ़ाया...
जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है।
यह सालाना इम्तिहान है, तमाशा नहीं है...
यही धुन है तुझको कि नंबर आएं नुमायाँ (शानदार)...
फिर भी हाथ में है मोबाइल उठाया...
दुरूसुल बलाग़ाह, क़ुत्बी या कि हिदाया।
एक हफ़्ते में सालाना (इम्तिहान) कर देगा बिल्कुल सफ़ाया,
जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है।
*यह सालाना इम्तिहान है, तमाशा नहीं है।*