मैं ग़रीबों से ही करता हूँ तिजारत (व्यापार) अक्सर;
जो चंद प...
Ummah Post
28 June, 2025

मैं ग़रीबों से ही करता हूँ तिजारत (व्यापार) अक्सर;

जो चंद पैसों में लाखों की दुआ देते हैं।

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बिना सोचे-समझे बोले गए शब्दों का ज़हर और रिश्तों की तबाही
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बिना सोचे-समझे बोले गए शब्दों का ज़हर और रिश्तों की तबाही

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