भरोसा वह नाज़ुक शीशा है जो एक बार टूट जाए, तो फिर कभी नहीं ज...
Ummah Post
29 June, 2025

भरोसा वह नाज़ुक शीशा है जो एक बार टूट जाए, तो फिर कभी नहीं जुड़ता; और अगर कभी जुड़ भी जाए, तो चेहरे दो ही नज़र आते हैं। 😔

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क्या पत्नी पर सास की सेवा करना वाजिब (अनिवार्य) है?
लेख

क्या पत्नी पर सास की सेवा करना वाजिब (अनिवार्य) है?

शेख मोहम्मद रावी से एक औरत ने सवाल पूछा कि उनके शौहर की वालिदा (माँ) बीमार रहती हैं। शौहर तक़ाज़ा (मांग) करता है कि मैं उनकी माँ की ख़िदमत (सेवा) करूँ और मुझसे यह सब नहीं होता। क्या मुझ पर शौहर की माँ की ख़िदमत वाजिब (अनिवार्य) है? शेख ने जवाब दिया, "नहीं, तुझ पर शौहर की माँ की ख़िदमत हरगिज़ वाजि...