"ग़रीब-ओ-सादा-ओ-रंगीन है दास्तान-ए-हरम,
निहायत (अंत) इसकी ह...
Ummah Post
5 July, 2025

"ग़रीब-ओ-सादा-ओ-रंगीन है दास्तान-ए-हरम,

निहायत (अंत) इसकी हसीन, इब्तिदा (आरंभ) है इस्माईल।"

— अल्लामा इकबाल

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ज़िंदगी का मीनार हमेशा सीधा रहेगा !!
लेख

ज़िंदगी का मीनार हमेशा सीधा रहेगा !!

रवायत है कि सात सौ बरस पहले इस्फ़हान में एक मस्जिद बन रही थी। काम तक़रीबन ख़त्म हो चुका था और कारीगर छोटे-छोटे आख़िरी काम कर रहे थे। एक बूढ़ी औरत का वहाँ से गुज़र हुआ। वह अचानक खड़ी हो गई और मस्जिद के मीनार की जानिब इशारा करके कहने लगी कि यह मेरी नज़र में टेढ़ा नज़र आ रहा है। कारीगर हँसने लगे तो...