मुसलमां रात-दिन सरगर्म (व्यस्त) हैं महलों की ख़्वाहिश में,...
Ummah Post
7 July, 2025

मुसलमां रात-दिन सरगर्म (व्यस्त) हैं महलों की ख़्वाहिश में,

किसे सरकार-ए-दो आलम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का अब घर याद आता है।

मुसलमानों ज़रा सोचो,

है क्या पाया है क्या खोया।

💔💔💔

Share this article
क्या पत्नी पर सास की सेवा करना वाजिब (अनिवार्य) है?
लेख

क्या पत्नी पर सास की सेवा करना वाजिब (अनिवार्य) है?

शेख मोहम्मद रावी से एक औरत ने सवाल पूछा कि उनके शौहर की वालिदा (माँ) बीमार रहती हैं। शौहर तक़ाज़ा (मांग) करता है कि मैं उनकी माँ की ख़िदमत (सेवा) करूँ और मुझसे यह सब नहीं होता। क्या मुझ पर शौहर की माँ की ख़िदमत वाजिब (अनिवार्य) है? शेख ने जवाब दिया, "नहीं, तुझ पर शौहर की माँ की ख़िदमत हरगिज़ वाजि...