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Ummah Post
3 October, 2024

https://play.google.com/store/apps/details?id=in.islamictube.pro

अस्सलामू अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातहू,

पूरे ऐप का जायज़ा लिया, माशाअल्लाह बहुत उपयोगी (मुफ़ीद) और आसान है। इस ऐप को तैयार करने में काफी मेहनत लगी है, जो मुस्लिम उम्माह के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।

जिसमें किताबों का बेशकीमती ख़ज़ाना है, तो मन्ज़ूम कलाम (कविताएं/नाअत) भी, इस्लामी लेख (मज़ामीन) और कैलेंडर (तक़्वीम) भी और इसके अलावा बहुत कुछ......

लिहाज़ा इस ऐप से फ़ायदा उठाएं और अपने दोस्तों और अज़ीज़ों को भी सूचित (मत्ला) करें.....

एड-फ्री (विज्ञापन मुक्त) वर्जन सालाना सिर्फ 52 रुपये देकर खरीद सकते हैं, जो इस ऐप पर खर्च होने वाली मेहनत के मुकाबले कुछ भी नहीं है.......

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पड़ोसियों का सम्मान और बेमिसाल सादगी:
लेख

पड़ोसियों का सम्मान और बेमिसाल सादगी:

हज़रत मौलाना सैयद असग़र हुसैन रहिमतुल्लाह अलैह (जो अपने मिलने वालों में हज़रत मियां साहब के नाम से मशहूर थे) दारुल उलूम देवबंद के उन उस्तादों में से थे जो शोहरत और नाम-ओ-नमूद (دکھاوے) से हमेशा कोसों दूर रहे। उन्होंने जीवन भर इस्लामी उलूम (ज्ञान) की तदरीस (शिक्षण) की सेवा की और हज़ारों छात्रों को अपन...