निगाह (दृष्टि)

✨ निगाह जब हया (शर्म) खो दे, तो गुनाह दरव...
Ummah Post
16 July, 2025

निगाह (दृष्टि)

✨ निगाह जब हया (शर्म) खो दे, तो गुनाह दरवाज़ा नहीं, राह बन जाते हैं। ✨

🌙 निगाह की ख़यानत (धोखा) दिल को अंधा कर देती है। 🌙

💔 निगाह नीची हो तो दिल ऊंचा हो जाता है। 💔

⚡ निगाह पाक (पवित्र) हो तो दिल भी पाक रहता है। ⚡

🔥 निगाह का एक तीर, इफ़्फ़त (पवित्रता) की ढाल को चीर देता है। 🔥

💞 निगाह वह आईना है, जिसमें नीयत की झलक साफ़ दिखती है। 💞

⚖️ निगाह की हिफ़ाज़त (सुरक्षा), ईमान की अलामत (निशानी) है। ⚖️

🍂 निगाह से गर दिल फिसल जाए, तो वापसी का रास्ता मुश्किल हो जाता है। 🍂

🌸 निगाह का पहला वार ही सबसे ज़्यादा ख़तरनाक होता है। 🌸

💎 निगाह झुक जाए तो शैतान हार जाता है। 💎

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लेख

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