عن أبي أُمامةَ رضيَ اللهُ عنه، قال: قال رسولُ الله صلَّى الله عليه وسلَّمَ:
«أكثِروا علَيَّ مِنَ الصَّلاةِ في كلِّ يومِ جُمُعةٍ؛ فإنَّ صلاةَ أُمَّتي تُعرَضُ علَيَّ في كلِّ يومِ جُمُعةٍ،
فمَنْ كان أكثَرَهم علَيَّ صلاةً؛ كان أقرَبَهم مِنِّي مَنزِلةً».
अबू उमामा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया:
"हर जुमा (शुक्रवार) के दिन मुझ पर कसरत से दरूद (दुआ-ए-रहमत) भेजा करो; क्योंकि मेरी उम्मत का दरूद हर जुमा को मेरे सामने पेश किया जाता है, अतः जो उनमें से मुझ पर सबसे ज़्यादा दरूद भेजने वाला होगा; वह मर्तबे (स्थान) में मेरे सबसे करीब होगा।"