*जहेज़ लेते वक्त मज़हब भूल जाते हैं,*
*हक़ महर लिखते वक्त द...
Ummah Post
21 July, 2025

*जहेज़ लेते वक्त मज़हब भूल जाते हैं,*

*हक़ महर लिखते वक्त दीन याद आता है।*

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दृष्टिकोण का सबक़: उस्ताद, शागिर्द और सेब की कहानी
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दृष्टिकोण का सबक़: उस्ताद, शागिर्द और सेब की कहानी

शागिर्द (छात्र) ग़ौर से सुन रहा था। उस्ताद (शिक्षक) ने पूछा, "अगर मैं तुम्हें एक सेब, और एक सेब, और एक सेब दूँ, तो तुम्हारे पास कितने सेब हो जाएंगे?" शागिर्द ने बिना किसी झिझक के जवाब दिया, "4।" उस्ताद को लगा कि शायद शागिर्द सवाल ठीक से समझ नहीं पाया। उस्ताद ने इत्मीनान से दोबारा पूछा... "देखो...