एक औरत मौलाना के पास गई और पूछा, "हज़रत मैंने सुना है कि तकब्बुक (अहंकार) बहुत बड़ा गुनाह है पर मैं क्या करूँ? जब भी आईना देखती हूँ तो अपनी ख़ूबसूरती देखकर ग़ुरूर (घमंड) किए बग़ैर नहीं रह सकती।"
मौलाना बोले, "मोहतरमा यह ग़ुरूर नहीं ग़लतफ़हमी है। और इसका कोई गुनाह नहीं है!" 🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣