इंसान के अख़लाक़ी वजूद (नैतिक अस्तित्व) को जो खतरनाक बीमारियां लाहक (ग्रसित) हैं, उनमें झूठ और मबालगे (अतिशयोक्ति) पर मबनी (आधारित) जिंदगी गुजारने का फितना (बुराई) आज-कल के दौर में सर-ए-फेहरिस्त (शीर्ष पर) है। एक वक्त था कि इंसान की जिंदगी के निजी पहलू पोशीदा (छिपे) रहते थे, मगर सोशल मीडिया और टेक्न...