*"ऐ अल्लाह! मैं तुझसे उस गुनाह के लिए माफी चाहता हूँ जिससे मैंने तौबा की लेकिन फिर उसका दोबारा इर्तकांब किया। और उस नेकी के लिए जिसका मैंने खुद से वादा किया लेकिन उस पर कायम न रह सका। और उस अमल के लिए जिसे मैंने सोचा था कि सिर्फ तेरे लिए करूँगा, लेकिन मेरी नियत में वह कुछ शामिल हो गया जो तू जानता है।"*
Ummah Post