इल्म (ज्ञान) से बढ़कर कोई ख़ज़ाना नहीं,
यह वह दौलत है जो छिन सकती नहीं।
पढ़ना, लिखना, सीखना सच,
हर बच्चे को है यह करना बच (यानी इसे अपनाना है)।
लेकिन सिर्फ इल्म (ज्ञान) काफी नहीं,
अच्छे अख़्लाक़ (व्यवहार/नैतिकता) भी ज़रूरी हैं यही।
झूठ न बोलें, सच को अपनाएं,
बड़ों का अदब (सत्कार) दिल से बजा लाएं।
उस्ताद (शिक्षक) का कहना मानें हम,
झूठ, चुगली, ग़ुस्सा सब कम।
सच्चाई, मेहनत, प्यार का रास्ता,
यही बनाता है इंसान को सच्चा!
ज्ञान (علم) के साथ हो दिल भी साफ़,
तब ही मिलेगा सब को इन्साफ़।
अच्छे बनो, नेक बनो, सच्चे रहो,
इल्म व अदब (ज्ञान और संस्कार) के साथ ही जियो।