इल्म (ज्ञान) से बढ़कर कोई ख़ज़ाना नहीं,
यह वह दौलत है जो छि...
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इल्म (ज्ञान) से बढ़कर कोई ख़ज़ाना नहीं,

यह वह दौलत है जो छिन सकती नहीं।

पढ़ना, लिखना, सीखना सच,

हर बच्चे को है यह करना बच (यानी इसे अपनाना है)।

लेकिन सिर्फ इल्म (ज्ञान) काफी नहीं,

अच्छे अख़्लाक़ (व्यवहार/नैतिकता) भी ज़रूरी हैं यही।

झूठ न बोलें, सच को अपनाएं,

बड़ों का अदब (सत्कार) दिल से बजा लाएं।

उस्ताद (शिक्षक) का कहना मानें हम,

झूठ, चुगली, ग़ुस्सा सब कम।

सच्चाई, मेहनत, प्यार का रास्ता,

यही बनाता है इंसान को सच्चा!

ज्ञान (علم) के साथ हो दिल भी साफ़,

तब ही मिलेगा सब को इन्साफ़।

अच्छे बनो, नेक बनो, सच्चे रहो,

इल्म व अदब (ज्ञान और संस्कार) के साथ ही जियो।

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मोहम्मद नाम के चार खुश-नसीब मुहद्दिसीन: इल्म-ए-हदीस की ख़िदमत का एक हैरतअंगेज़ वाक़या
लेख

मोहम्मद नाम के चार खुश-नसीब मुहद्दिसीन: इल्म-ए-हदीस की ख़िदमत का एक हैरतअंगेज़ वाक़या

तीसरी सदी हिजरी में मिस्र में चार मुहद्दिसीन (हदीस के विद्वान) बहुत मशहूर हुए। चारों का नाम 'मोहम्मद' था, और चारों ही इल्म-ए-हदीस के जलील-उल-क़द्र (महान) अइम्मा (इमामों) में शुमार होते थे। उनमें से एक मोहम्मद बिन नस्र मर्वज़ी (रहमतुल्लाह अलैह) हैं, दूसरे मोहम्मद बिन जरीर तबरी (रहमतुल्लाह अलैह), तीसर...