#सोशल_मीडिया_का_आशिक
चूना लगा रहा है (धोखा दे रहा है) मोहब्बत के नाम पर;
उल्लू बना रहा है मोहब्बत के नाम पर।
फूलों के रस के शौक़ में बेताब सा भँवरा;
चक्कर चला रहा है मोहब्बत के नाम पर।
इल्म व अदब (ज्ञान और साहित्य) के जाल को लफ़्ज़ों में ढाल कर;
बातों में ला रहा है (फ़ँसा रहा है) मोहब्बत के नाम पर।
ख़्वाहिश (वासना) की बेलगाम सवारी पे बैठ कर;
दोज़ख़ (नरक) को जा रहा है मोहब्बत के नाम पर।
बातिल (झूठे) तसव्वुरात लिए जाग जाग कर;
ख़ुद को थका रहा है मोहब्बत के नाम पर।
दिल को असीर-ए-नफ़्स (इच्छाओं का ग़ुलाम) किया जान बूझ कर;
अब तिलमिला रहा है मोहब्बत के नाम पर।
क़ल्बी सुकूँ (दिल का चैन) गँवा के मोहब्बत के शौक़ में;
हँस कर हँसा रहा है मोहब्बत के नाम पर।
नाजाएज़ व हराम है दीन-ए-मुबीन (स्पष्ट धर्म/इस्लाम) में;
लज़्ज़त (आनंद) जो पा रहा है मोहब्बत के नाम पर।
- हुदहुद इलाहाबादी