#सोशल_मीडिया_का_आशिक

चूना लगा रहा है (धोखा दे रहा है) मोह...
Ummah Post
5 October, 2024

#सोशल_मीडिया_का_आशिक

चूना लगा रहा है (धोखा दे रहा है) मोहब्बत के नाम पर;

उल्लू बना रहा है मोहब्बत के नाम पर।

फूलों के रस के शौक़ में बेताब सा भँवरा;

चक्कर चला रहा है मोहब्बत के नाम पर।

इल्म व अदब (ज्ञान और साहित्य) के जाल को लफ़्ज़ों में ढाल कर;

बातों में ला रहा है (फ़ँसा रहा है) मोहब्बत के नाम पर।

ख़्वाहिश (वासना) की बेलगाम सवारी पे बैठ कर;

दोज़ख़ (नरक) को जा रहा है मोहब्बत के नाम पर।

बातिल (झूठे) तसव्वुरात लिए जाग जाग कर;

ख़ुद को थका रहा है मोहब्बत के नाम पर।

दिल को असीर-ए-नफ़्स (इच्छाओं का ग़ुलाम) किया जान बूझ कर;

अब तिलमिला रहा है मोहब्बत के नाम पर।

क़ल्बी सुकूँ (दिल का चैन) गँवा के मोहब्बत के शौक़ में;

हँस कर हँसा रहा है मोहब्बत के नाम पर।

नाजाएज़ व हराम है दीन-ए-मुबीन (स्पष्ट धर्म/इस्लाम) में;

लज़्ज़त (आनंद) जो पा रहा है मोहब्बत के नाम पर।

- हुदहुद इलाहाबादी

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