क़ुरआन पाक और इस्लाह (सुधार)
इमाम शाफ़ई (रहमतुल्लाह अलैह) ने अपने शागिर्द (शिष्य) रबी बिन सुलैमान (रहमतुल्लाह अलैह) को वसीयत (नसीहत) करते हुए फ़रमाया:
"जब तुम अपने दिल, या अपने बेटे, या अपने भाई, या जिस किसी के लिए भी चाहो कि उसकी इस्लाह (सुधार) हो जाए; तो उसे क़ुरआन के बाग़ में छोड़ दो। क़ुरआन की सोहबत (संगति) में अनक़रीब (शीघ्र ही) अल्लाह तआला उसकी इस्लाह कर देगा; चाहे वह शख़्स खुद चाहे या न चाहे!"
(हिल्यत उल-औलिया अबू नुऐम: 9/123)