"बर्दाश्त (सहनशीलता) के कानों से सुनो, रहम (दया) की आँखों से देखो, और मोहब्बत की ज़ुबान से बात करो।"
- मौलाना जलालुद्दीन रूमी
"बर्दाश्त (सहनशीलता) के कानों से सुनो, रहम (दया) की आँखों से देखो, और मोहब्बत की ज़ुबान से बात करो।"
- मौलाना जलालुद्दीन रूमी