"किसी की हज़ार तसल्लियां वो काम नहीं करतीं जो क़ुरआन करीम की एक आयत कर देती है।
'डरो नहीं बेशक मैं तुम्हारे साथ हूँ, मैं सुन रहा हूँ और देख भी रहा हूँ।'
[अल-क़ुरआन: सूरह ताहा: 46]"
"किसी की हज़ार तसल्लियां वो काम नहीं करतीं जो क़ुरआन करीम की एक आयत कर देती है।
'डरो नहीं बेशक मैं तुम्हारे साथ हूँ, मैं सुन रहा हूँ और देख भी रहा हूँ।'
[अल-क़ुरआन: सूरह ताहा: 46]"