"दूसरों को माफ़ कर दें, इसलिए नहीं कि वे माफ़ी के हक़दार (मु...
Ummah Post
25 August, 2025

"दूसरों को माफ़ कर दें, इसलिए नहीं कि वे माफ़ी के हक़दार (मुस्तहिक) हैं, बल्कि इसलिए कि आप मानसिक शांति (ज़ेहनी सुकून) के हक़दार हैं।"

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आख़िरी सफ़र की पुकार
लेख

आख़िरी सफ़र की पुकार

सालिहीन (नेक लोगों) में से एक शख़्स रोज़ाना शहर की दीवार पर खड़े होकर रात में यह आवाज़ लगाता था, "चलो, क़ाफ़िले के चलने का वक़्त आ गया है"। जब उनका इंतक़ाल (निधन) हो गया, तो शहर के हाकिम (शासक) को यह आवाज़ सुनाई नहीं दी। तहक़ीक़ (जांच) करने पर पता चला कि उनकी वफ़ात हो गई है, तो अमीर (शासक) ने ये अशआ...