फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की अपने उपन्यास "अल-मसाकीन" (पुअर फोक) म...
Ummah Post
26 August, 2025

फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की अपने उपन्यास "अल-मसाकीन" (पुअर फोक) में कहते हैं:

"शायद मैं जल्द मर जाऊं, तब कोई मुझे याद नहीं करेगा, और न ही मेरी कब्र पर कोई रुकेगा। कुछ लोग जो मुझे जानते थे कहेंगे: वह शरीफ और नेक आदमी था, और कुछ दूसरे कहेंगे: वह कमीना और घटिया था।

मेरा वर्क (पन्ना) ज़िंदगी के रजिस्टर से लपेट दिया जाएगा, और मेरे आने का कोई निशान बाकी न रहेगा। ज़िंदगी मेरे बाद भी वैसी ही चलेगी जैसी पहले थी, उसमें कुछ नहीं बदलेगा, सूरज रोज़ की तरह उदय होगा और शाम को अस्त हो जाएगा।

एकमात्र चीज़ जो बदलेगी, वह मेरी गैर-मौजूदगी होगी।

और इस तरह मैंने अपनी सारी ज़िंदगी बेचैनी और शक में गुज़ार दी, उससे डरता रहा जो हो चुका, और उससे भी जो होने वाला है, खुद को भूल बैठा और दूसरों की बातों में उलझा रहा।"

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लेख

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