"क्या तुम्हें ग़ैरत (शर्म) नहीं आती?

लोग अल्लाह की तरफ़ त...
Ummah Post
26 August, 2025

"क्या तुम्हें ग़ैरत (शर्म) नहीं आती?

लोग अल्लाह की तरफ़ तुमसे आगे निकल गए हैं, और तुम हो कि अभी तक अपनी शहवतों (नफ़्सानी ख़्वाहिशात) के पीछे घिसट रहे हो!

ऐ मिस्कीन (बेचारे), ज़रा होश के नाख़ून लो!

(अरबी से अनुवाद)"

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फ़ज़ल बिन रबी' की दरियादिली
लेख

फ़ज़ल बिन रबी' की दरियादिली

एक शख़्स ने फ़ज़ल बिन रबी' के नाम का एक फ़र्ज़ी (जाली) ख़त लिखा, जिसमें अपने लिए एक हज़ार दीनार का हुक्म जारी करके दस्तख़त (हस्ताक्षर) किए गए थे। वह शख़्स ख़त लेकर फ़ज़ल बिन रबी' के ख़ज़ांची (कैशियर) के पास पहुँचा। उसने ख़त पढ़ लिया मगर उसे कोई शक नहीं हुआ। वह उसे एक हज़ार दीनार सौंपने ही वाला था कि...