"मैं जानता हूँ कि तसल्ली के सारे शब्द मिलकर भी दिल में बने एक सुराख़ (छेद) को नहीं भर सकते; तो फिर तुम्हारे दिल का क्या हाल होगा जो छलनी की तरह है, जिसके हर सुराख़ से कोई अज़ीज़ (प्रियजन) गुज़रा और चला गया।"
- अधम शरकावी (أدهم شرقاوي)
"मैं जानता हूँ कि तसल्ली के सारे शब्द मिलकर भी दिल में बने एक सुराख़ (छेद) को नहीं भर सकते; तो फिर तुम्हारे दिल का क्या हाल होगा जो छलनी की तरह है, जिसके हर सुराख़ से कोई अज़ीज़ (प्रियजन) गुज़रा और चला गया।"
- अधम शरकावी (أدهم شرقاوي)