"मैं जानता हूँ कि तसल्ली के सारे शब्द मिलकर भी दिल में बने ए...
Ummah Post
26 August, 2025

"मैं जानता हूँ कि तसल्ली के सारे शब्द मिलकर भी दिल में बने एक सुराख़ (छेद) को नहीं भर सकते; तो फिर तुम्हारे दिल का क्या हाल होगा जो छलनी की तरह है, जिसके हर सुराख़ से कोई अज़ीज़ (प्रियजन) गुज़रा और चला गया।"

- अधम शरकावी (أدهم شرقاوي)

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फ़ितना-ए-क़ादियानियत का पस-मंज़र (संक्षेप में)
लेख

फ़ितना-ए-क़ादियानियत का पस-मंज़र (संक्षेप में)

उपमहाद्वीप (पाक-ओ-हिंद) में जब अंग्रेज़ अपने ज़ुल्म-ओ-सितम और ज़्यादतियों के बावजूद मुसलमानों को मग़लूब (परास्त) न कर सका, तो उसने एक कमीशन के ज़रिए इसकी वजह मालूम करने के लिए पूरे हिंदुस्तान का सर्वे कराया। कमिशन ने यह रिपोर्ट पेश की कि मुसलमानों को मग़लूब करने के लिए उनके दिलों से जज़्बा-ए-जिहाद (...