"पाँव गीला किए बगैर समंदर तो पार किया जा सकता है, मगर आँसू ब...
Ummah Post
27 August, 2025

"पाँव गीला किए बगैर समंदर तो पार किया जा सकता है, मगर आँसू बहाए बगैर ज़िंदगी नहीं गुज़ारी जा सकती!

- मुस्तनसर हुसैन तारड़"

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नमाज़ की बरकत और इंसान की फ़ितरत
लेख

नमाज़ की बरकत और इंसान की फ़ितरत

आज फज्र के बाद मैं तिलावत (कुरान का पाठ) कर रहा था तो सूरह अल-मआरिज की एक आयत पर आकर रुक सा गया। बात इंसान की तख़्लीक़ (सृष्टि) के बारे में थी कि इंसान असल में पैदा कैसा हुआ है। आयत थी: "इन्नल इंसाने ख़ुलिक़ा हलूआ" (बेशक इंसान बहुत कम हौसला पैदा किया गया है) हक़ीक़त यह है कि इंसान में सब्र और...