"ऐ गुनाहों की कसरत (अधिकता) का बोझ उठाए, और गिरिया व ज़ारी (र...
Ummah Post
28 August, 2025

"ऐ गुनाहों की कसरत (अधिकता) का बोझ उठाए, और गिरिया व ज़ारी (रोने-धोने) से महरूम शख्स!

अपने अश्कों (आंसुओं) के क़हत (सूखे) पर रोया कर।

असलाफ़ (पूर्वज) तो बेहतरीन तक़्वा (परहेज़गारी) के मालिक थे मगर फिर भी रोते थे। तेरे पास गुनाहों का अंबार है और तू हंसता है।"

[अल-ख़वातिम लि-इब्न अल-जौज़ी: 254]

Share this article
दुम कटा लोमड़ और बिगड़ा हुआ समाज
लेख

दुम कटा लोमड़ और बिगड़ा हुआ समाज

एक लोमड़ (सियार) की दुम (पूंछ) पर पत्थर आ गिरा, और दुम कट गई। एक दूसरे लोमड़ ने जब उसे देखा तो पूछा, "यह तुमने अपनी दुम क्यों काटी?" दुम कटा लोमड़ बोला, "इससे बड़ी खुशी और फरहत (आनंद) महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे हवाओं में उड़ रहा हूँ। वाह!! क्या मनोरंजन है!" बस घेर-घार कर (बहला-फुसलाकर) उ...