और मंज़र भी मुहैय्या (उपलब्ध) थे बसारत (दृष्टि) को मगर...
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Ummah Post
30 August, 2025

और मंज़र भी मुहैय्या (उपलब्ध) थे बसारत (दृष्टि) को मगर...

मेरी आँखों ने फ़क़त (सर्फ़) आपका रास्ता देखा। 🌸

सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (अल्लाह की रहमत और सलामती हो उन पर और उनकी आल पर)। 🤍

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इल्म का मंशूर: शरियत के विद्यार्थियों (तलबा) के लिए महत्वपूर्ण और इब्रतनाक नसीहतें (भाग दो)
लेख

इल्म का मंशूर: शरियत के विद्यार्थियों (तलबा) के लिए महत्वपूर्ण और इब्रतनाक नसीहतें (भाग दो)

बिस्मिल्लाह; रब्बी यस्सिर व अ'इन! (अल्लाह के नाम से; ऐ मेरे रब, आसानी फ़रमा और मदद कर!) नोट: इस मंशूर (घोषणापत्र) के मुखातिब (संबोधित लोग) सिर्फ उलूमे शरीयत (इस्लामी शास्त्र के ज्ञान) के तलबा (विद्यार्थी) हैं। इल्मे शरई (धार्मिक ज्ञान) को अल्लाह तआला ने 'कौले थक़ील' (एक भारी बात) क़रार दिया है। य...