यह सोशल मीडिया का दौर है ईमां बचा बेटी,
हमेशा सर पे तक़्वा...
Ummah Post
30 August, 2025

यह सोशल मीडिया का दौर है ईमां बचा बेटी,

हमेशा सर पे तक़्वा (परहेज़गारी) के दुपट्टे को सजा बेटी।

निदा-ए-ला तबर्रज्ना (पाक क़ुरआन की पुकार) में क्या पैग़ाम पोशीदा (छुपा) है,

ख़ुदा-ए-पाक ने क़ुरआं में देखो क्या लिखा बेटी।

यह दुनिया आरज़ी (अस्थायी) व मुख़्तसर (छोटी) है, जेल जैसी है,

दिमाग़ व दिल में उक़्बा (आख़िरत) की हसीं ख़ुशबू बसा बेटी।

मोबाइल दिल की दुनिया के लिए तूफ़ान जैसा है,

मोबाइल से हटाकर दिल को क़ुरआं में लगा बेटी।

मुसलसल (लगातार) ख़ुद को दावत दे, मुसलसल ख़ुद को यह समझा,

तेरा हमदर्द व मोहसिन (उपकारी) है मुहम्मद मुस्तफ़ा (ﷺ) बेटी!

निगाह-ए-दिल से आक़ा (ﷺ) की मुबारक ज़िंदगी पढ़ कर,

हमारी कामयाबी दीन में सबको बता बेटी।

- हुदहुद इलाहाबादी

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