*भलाई की खेती करें, चाहे बंजर ज़मीन में ही क्यों न हो, क्योंक...
Ummah Post
31 August, 2025

*भलाई की खेती करें, चाहे बंजर ज़मीन में ही क्यों न हो, क्योंकि अल्लाह तआला वहाँ भी उगाता है जहाँ आप उम्मीद नहीं करते।*

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मतभेदों के बावजूद बेमिसाल इत्तिहाद – क़ैसर-ए-रोम को एक ऐतिहासिक जवाब
लेख

मतभेदों के बावजूद बेमिसाल इत्तिहाद – क़ैसर-ए-रोम को एक ऐतिहासिक जवाब

हज़रात-ए-सहाबा-ए-किराम (रज़ियल्लाहु अन्हुम) में कुछ मसलों पर मतभेद (इख़्तिलाफ़) रहा है; मगर एक-दूसरे के सम्मान (एहतराम) में कभी फ़र्क़ नहीं आया। कौन नहीं जानता कि ख़ून-ए-उस्मान (रज़ियल्लाहु अन्हु) के मसले पर सहाबा-ए-किराम में शदीद (गंभीर) मतभेद हुआ और इसकी वजह से जंग भी हुई; मगर क्या मजाल कि उनके इस...