"यह जो माँ की मोहब्बत होती है,
 तमाम मोहब्बतों की 'माँ' होत...
Ummah Post
1 September, 2025

"यह जो माँ की मोहब्बत होती है,

तमाम मोहब्बतों की 'माँ' होती है।" ❤️

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दुनिया की हक़ीक़त और आख़िरी सफ़र की तैयारी
लेख

दुनिया की हक़ीक़त और आख़िरी सफ़र की तैयारी

रसूलुल्लाह ﷺ फ़रमाया करते थे: "मेरा दुनिया से क्या तअल्लुक़ (संबंध)? मेरी दुनिया की मिसाल तो ऐसी ही है कि जैसे कोई सवार किसी दरख़्त (पेड़) के साए में (दम लेने के लिए) ठहर जाए, फिर उसे छोड़ कर चला जाए।" हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने अपने साथियों को वसीयत फ़रमाई: "(दुनिया से) गुज़र जाओ, इसे आबाद करने में न लग...