आए दुनिया में बहुत पाक व मुकर्रम (पवित्र और सम्मानित) बन कर,...
Ummah Post
29 September, 2025

आए दुनिया में बहुत पाक व मुकर्रम (पवित्र और सम्मानित) बन कर,

आया न मगर कोई रहमत-ए-आलम (संसार के लिए दयालु) बन कर।

दमकता रहे तेरे रौज़े का मंज़र, सलामत रहे तेरे रौज़े की जाली,

हमें भी अता हो वह शौक़-ए-अबूज़र, हमें भी अता हो वह जज़्बा-ए-बिलाली।

थकी है फ़िक्र-ए-रसाँ (सोच और बुद्धि), मदह (प्रशंसा) बाक़ी है, क़लम है आबला-पा (थका हुआ/छालेदार), मदह बाक़ी है,

वरक़ (पन्ने) तमाम हुआ, मदह बाक़ी है, और उम्र तमाम लिखा, मदह बाक़ी है।

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दुनिया की हक़ीक़त और आख़िरी सफ़र की तैयारी
लेख

दुनिया की हक़ीक़त और आख़िरी सफ़र की तैयारी

रसूलुल्लाह ﷺ फ़रमाया करते थे: "मेरा दुनिया से क्या तअल्लुक़ (संबंध)? मेरी दुनिया की मिसाल तो ऐसी ही है कि जैसे कोई सवार किसी दरख़्त (पेड़) के साए में (दम लेने के लिए) ठहर जाए, फिर उसे छोड़ कर चला जाए।" हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने अपने साथियों को वसीयत फ़रमाई: "(दुनिया से) गुज़र जाओ, इसे आबाद करने में न लग...