ज़फ़र अली ख़ान ने कहा:
"दियार-ए-यसरिब (मदीना की सरज़मीन) मे...
Ummah Post
29 September, 2025

ज़फ़र अली ख़ान ने कहा:

"दियार-ए-यसरिब (मदीना की सरज़मीन) में घूमता हूँ, नबी की दहलीज़ चूमता हूँ।

शराब-ए-इश्क़ पी कर झूमता रहूँ; रहे सलामत पिलाने वाला।"

शेख़-उल-हिन्द (रह.) ने जन्नत से मुख़ातिब (संबोधित) होकर फ़रमाया:

"तुझ में हूर व क़सूर (महल) रहते हैं, मैंने माना ज़रूर रहते हैं।

मेरे दिल का तवाफ़ कर जन्नत, मेरे दिल में हुज़ूर (ﷺ) रहते हैं।"

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लेख

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