"परिंदे चींटियों को खाते हैं और जब वे मर जाते हैं तो चींटिया...
Ummah Post
6 October, 2025

"परिंदे चींटियों को खाते हैं और जब वे मर जाते हैं तो चींटियाँ उन्हें खा जाती हैं। हालात बदल सकते हैं, इसलिए किसी को हकीर (छोटा) मत समझो। आज आप मजबूत (शक्तिशाली) हो सकते हैं, लेकिन याद रखो समय आपसे ज़्यादा मजबूत है..." 💯

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आदात, अख़लाक़ और तर्ज़-ए-अमल ख़ून और नस्ल दोनों की पहचान करा देते हैं
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आदात, अख़लाक़ और तर्ज़-ए-अमल ख़ून और नस्ल दोनों की पहचान करा देते हैं

एक बादशाह के दरबार में एक अजनबी नौकरी की तलब लिए हाज़िर हुआ, क़ाबिलियत पूछी गई, कहा कि मैं सियासी हूँ। बादशाह के पास सियासतदानों की भीड़ रहती थी, उसे ख़ास घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज बना लिया गया, जो हाल ही में फ़ौत हो चुका था। चंद दिन बाद बादशाह ने उससे अपने सबसे महँगे और अज़ीज़ घोड़े के मुतअल्लिक़...