फिक्ह (इस्लामी न्यायशास्त्र) से अनुकूलता पैदा करने का तरीका...
Ummah Post
7 October, 2025

फिक्ह (इस्लामी न्यायशास्त्र) से अनुकूलता पैदा करने का तरीका

एक सज्जन ने (फकीह-उल-उम्मत मुफ्ती महमूद हसन साहब गंगोही रहिमहुल्लाह से) दरियाफ्त (सवाल) किया कि:

"फिक्ह से अनुकूलता पैदा करने के लिए मैं कौन सी किताब देखूं?"

उन्होंने फरमाया: "'बदाइअुस सनाइअु' देखिए, उसमें उसूल (नियम) और लिम (शंका और समाधान) बहुत हैं। जुज़इयात (विवरणों) के लिए 'शामी' देखिए, तआरुज़-ए-अदिल्लाह (साक्ष्यों के टकराव) के लिए 'फ़त्हुल क़दीर' देखिए, इस्तेदलाल बिल-हदीस (हदीस से दलील लेने) के लिए 'ज़ैलई शरह कंज़' देखिए। 'अहकामुल कुरान अबूबक्र जस्सास राजी' की देखिए कि वे सबसे पहले किसी मसले को आयत से साबित करते हैं, फिर उसके समर्थन में जो आयतें होती हैं, उन्हें पेश करते हैं, फिर समर्थक हदीसें ज़िक्र करते हैं, उसके बाद आसार और सहाबा के अक़्वाल (कथन) बयान करते हैं।"

मल्फूज़ात फकीह-उल-उम्मत 1/क़िस्त 4, पृष्ठ 35. स.ज़.

Share this article
अहसान का बदला
लेख

अहसान का बदला

बनू क़ुरैज़ा, जो यहूदियों का एक मशहूर क़बीला है, उसने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ अपने समझौते (मुआहिदे) का उल्लंघन करते हुए ग़ज़वा-ए-ख़न्दक़ (ख़न्दक़ की जंग) में कुफ़्फ़ार-ए-क़ुरैश की मदद की थी। मुसलमानों ने ग़ज़वा-ए-ख़न्दक़ से फ़ारिग होकर बनू क़ुरैज़ा पर हमला किया और तक़रीबन सारे क़...