ज़िक्र-ए-इलाही (अल्लाह का स्मरण) — थके हुए लम्हों का सहारा.....
Ummah Post
10 October, 2025

ज़िक्र-ए-इलाही (अल्लाह का स्मरण) — थके हुए लम्हों का सहारा... ☔

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ऐसी नमाज़ अब कौन पढ़ेगा?
लेख

ऐसी नमाज़ अब कौन पढ़ेगा?

बयान किया जाता है कि एसाम बिन यूसुफ, हज़रत हातिम असम्म रहमतुल्लाह अलैह की मजलिस में आए और उन पर आपत्ति (ऐतराज़) करना चाहा। अतः एसाम ने हातिम से कहा: "ऐ अबू अब्दुल रहमान!" (यह हातिम की कुन्नियत है) "आप नमाज़ किस तरह अदा करते हैं?" हातिम रहमतुल्लाह अलैह ने उनकी ओर मुतवज्जोह होकर फ़रमाया: "जब नमाज़ का...