कभी-कभी दिल चाहता है कि बस वैसे ही सो जाऊँ... जैसे सूरह कहफ़ के असहाब-ए-कहफ़ (गुफ़ा वाले) सोए थे... 🌷
सदियों की नींद हो... ऐसी ख़ामोशी हो जहाँ कोई दर्द, कोई सदा (आवाज़) न पहुँचे... ♥️
और जब आँख खुले... तो यह दौर, यह तकलीफ़ें सब कुछ बीत चुका हो। न कोई पहचान बाक़ी हो... न मैं किसी को जानूँ, न कोई मुझे...
बस एक नई दुनिया हो... जहाँ सिर्फ़ सुकून का राज हो... 🍂✨