कभी-कभी दिल चाहता है कि बस वैसे ही सो जाऊँ... जैसे सूरह कहफ़...
Ummah Post
17 October, 2025

कभी-कभी दिल चाहता है कि बस वैसे ही सो जाऊँ... जैसे सूरह कहफ़ के असहाब-ए-कहफ़ (गुफ़ा वाले) सोए थे... 🌷

सदियों की नींद हो... ऐसी ख़ामोशी हो जहाँ कोई दर्द, कोई सदा (आवाज़) न पहुँचे... ♥️

और जब आँख खुले... तो यह दौर, यह तकलीफ़ें सब कुछ बीत चुका हो। न कोई पहचान बाक़ी हो... न मैं किसी को जानूँ, न कोई मुझे...

बस एक नई दुनिया हो... जहाँ सिर्फ़ सुकून का राज हो... 🍂✨

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इमाम मोहम्मद (रह.) का इल्मी शौक़ और शब-बेदारी / इमाम मोहम्मद (रह.) का इल्मी शऊर
लेख

इमाम मोहम्मद (रह.) का इल्मी शौक़ और शब-बेदारी / इमाम मोहम्मद (रह.) का इल्मी शऊर

इमाम मोहम्मद (रह.) के नाम से कौन नावाक़िफ़ (अपरिचित) है, इन्हीं की किताबों ने हनफ़ी फ़िक़्ह को मुदव्वन (मूर्तरूप/कोडीफाइड) किया, मसलों के दलायल (प्रमाण) जमा किए, इख़्तेलाफ़ी अक़्वाल (मतभेदों) का ज़िक्र किया और दुनिया के अक्सर (अधिकांश) ख़ित्तों (क्षेत्रों) में रायज (प्रचलित) फ़िक़्ह-ए-हनफ़ी को तस्नी...