रसूल-ए-मुज्तबा कहिए, मोहम्मद मुस्तफ़ा कहिए,
ख़ुदा के बाद बस...
Ummah Post
21 October, 2025

रसूल-ए-मुज्तबा कहिए, मोहम्मद मुस्तफ़ा कहिए,

ख़ुदा के बाद बस वो हैं, फिर उसके बाद क्या कहिए!

शरीअत का है ये इसरार, ख़ातमुल-अम्बिया कहिए,

मोहब्बत का तक़ाज़ा है कि महबूब-ए-ख़ुदा कहिए!

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इतिहास की सबसे शक्तिशाली माफ़ी (हज़रत अबू ज़र और हज़रत बिलाल का वाक़िया)
लेख

इतिहास की सबसे शक्तिशाली माफ़ी (हज़रत अबू ज़र और हज़रत बिलाल का वाक़िया)

जब हज़रत अबू ज़र (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने हज़रत बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) को कहा... "ऐ काली-कलूटी माँ के बेटे! अब तू भी मेरी ग़लतियाँ निकालेगा...?" बिलाल यह सुनकर ग़ुस्से और अफ़सोस से बेक़रार होकर यह कहते हुए उठे, "ख़ुदा की क़सम! मैं इसे ज़रूर ब-ज़रूर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के...