रसूल-ए-मुज्तबा कहिए, मोहम्मद मुस्तफ़ा कहिए,
ख़ुदा के बाद बस वो हैं, फिर उसके बाद क्या कहिए!
शरीअत का है ये इसरार, ख़ातमुल-अम्बिया कहिए,
मोहब्बत का तक़ाज़ा है कि महबूब-ए-ख़ुदा कहिए!
रसूल-ए-मुज्तबा कहिए, मोहम्मद मुस्तफ़ा कहिए,
ख़ुदा के बाद बस वो हैं, फिर उसके बाद क्या कहिए!
शरीअत का है ये इसरार, ख़ातमुल-अम्बिया कहिए,
मोहब्बत का तक़ाज़ा है कि महबूब-ए-ख़ुदा कहिए!