तुम खरीदने की बात करते हो... तुम्हारी मुफ़्त की पेशकश भी हमा...
Ummah Post
21 February, 2026

तुम खरीदने की बात करते हो... तुम्हारी मुफ़्त की पेशकश भी हमारे ज़मीर (अंतरात्मा) को कायल नहीं कर पाएगी। यह चमक-दमक... यह रंगीन ऑफर्स... यह बज़ाहिर (स्पष्ट) सहूलियतें... तुम्हारा मकरूह (घिनौना) चेहरा नहीं छुपा सकतीं। हम नहीं भूल सकते कि हर एक बुलबुले के पीछे कई बेआवाज़ आहें... कई मासूम सांसें... और कई निहत्थों का ख़ून है। हम ठान चुके हैं कि हम उन हाथों को मज़बूत नहीं बनाएंगे... जो ज़ालिम के लिए ज़ंजीर और क़ातिल के लिए हथियार बनाते हैं। मुझसे अगर कोई मेरे दिल की बात पूछे तो मैं इन इस्राइली मसनूआत (उत्पादों) को इस तरह ख़ुद पर हराम (वर्जित) समझता हूँ, जिस तरह शराब हराम है... (अगरचे शरीयत के लिहाज़ से हराम नहीं है)।

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