अजीब लोग थे वो तितलियां बनाते थे,
समंदरों के लिए सीपियां बन...
Ummah Post
25 February, 2026

अजीब लोग थे वो तितलियां बनाते थे,

समंदरों के लिए सीपियां बनाते थे।

वही बनाते थे लोहे को तोड़ कर ताला,

फिर उस के बाद वही चाबियां बनाते थे।

मेरे कबीले में तालीम (शिक्षा) का रिवाज न था,

मेरे बुज़ुर्ग मगर तख्तियां बनाते थे।

फ़ुज़ूल (खाली) वक़्त में वो सारे शीशागर मिल कर,

सुहागनों के लिए चूड़ियां बनाते थे।

हमारे गाँव में दो-चार हिंदू दर्जी थे,

नमाज़ियों के लिए टोपियां बनाते थे।

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