ईरान का बड़ा नुकसान
ईरान के सरकारी मीडिया ने आज सुबह पुष्टि...
Ummah Post
28 February, 2026

ईरान का बड़ा नुकसान

ईरान के सरकारी मीडिया ने आज सुबह पुष्टि की है कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई शनिवार को हुए दज्जानी (राक्षसी) हवाई हमलों में शहीद हो गए। इस घोषणा से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी यह खबर दे चुके थे। हालांकि, शुरुआत में तेहरान की ओर से इसका खंडन किया गया था, लेकिन बाद में सरकारी स्तर पर इसकी पुष्टि कर दी गई और देश में चालीस दिनों के शोक के साथ सात दिनों के सरकारी अवकाश की घोषणा की गई।

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने अपने बयान में खामेनेई की शहादत को वैश्विक तागुती (दमनकारी) ताकतों के खिलाफ एक नए संघर्ष की शुरुआत बताया। पासदारान-ए-इंकलाब (रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) ने भी बदला लेने का ऐलान किया। ईरानी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, हमला उस समय हुआ जब सुप्रीम लीडर अपने कार्यालय में सरकारी कामकाज कर रहे थे। अपुष्ट खबरों के मुताबिक, इन हमलों में उनके कुछ करीबी परिवार वाले भी निशाना बने हैं।

दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कार्रवाई को ईरानी जनता और अमेरिकियों दोनों के लिए न्याय करार दिया। उनके अनुसार, ईरानी नेतृत्व आधुनिक खुफिया और निगरानी प्रणाली से बच नहीं सका। अमेरिकी समाचार चैनलों NBC News, CBS News और ABC News को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान में फैसले लेने वाले केंद्रीय नेतृत्व का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो चुका है और अब नेतृत्व में बदलाव अपरिहार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि बमबारी कम से कम कुछ दिनों तक जारी रहेगी और जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाया जा सकता है।

अमेरिकी वेबसाइट Axios को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने संकेत दिया कि उनके पास सैन्य कार्रवाई के अलावा भी वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं, लेकिन उनका दावा था कि ईरान ने हाल के महीनों में अपने परमाणु ढांचे को बहाल करने की कोशिश की थी, जिसने इस हमले को अनिवार्य बना दिया। स्वतंत्र विश्लेषकों ने निर्माण गतिविधियों की ओर इशारा तो किया है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम की पूर्ण बहाली के सबूत सामने नहीं आए हैं।

अल जजीरा के मुताबिक, दज्जानी ताकतों का यह हमला महज एक सैन्य कार्रवाई नहीं है बल्कि यह ईरानी राज्य के ढांचे और पूरे क्षेत्र के लिए एक भूकंप साबित हो सकता है। खामेनेई तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान के सबसे शक्तिशाली पद पर रहे और राज्य, सैन्य और धार्मिक संस्थानों की दिशा तय करते रहे। उनके जाने से पैदा हुए खालीपन ने नेतृत्व की निरंतरता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।

पिछले दिनों कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया में खबरें चल रही थीं कि 67 वर्षीय अली लारीजानी को डिप्टी या संभावित उत्तराधिकारी के रूप में सामने लाया जा सकता है। लारीजानी अतीत में पासदारान-ए-इंकलाब से जुड़े रहे हैं, संसद के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों में प्रभाव रखते हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर नए सुप्रीम लीडर या कार्यवाहक की नियुक्ति के संबंध में कोई अंतिम घोषणा सामने नहीं आई है। ईरान की संवैधानिक प्रक्रिया 'मजलिस-ए-खुबरेगान-ए-रहबरी' (विशेषज्ञों की परिषद) के माध्यम से नए नेता के चुनाव की मांग करती है, इसलिए अगले कुछ दिन बेहद निर्णायक होंगे।

इस हमले की सफलता की पृष्ठभूमि में आंतरिक सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। ईरानी हलकों में यह धारणा पाई जाती है कि इतने उच्च स्तर तक पहुंच केवल बाहरी तकनीक से संभव नहीं थी, बल्कि आंतरिक कमजोरी या जानकारी लीक होने ने भूमिका निभाई होगी। ईरान पिछले वर्षों में आंतरिक नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करता रहा है, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा ढांचे की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।

सैन्य दृष्टिकोण से, वर्तमान चरण में असली लड़ाई मिसाइल और हवाई रक्षा प्रणाली की है। ईरान की जवाबी क्षमता उसके बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल कार्यक्रम पर निर्भर करती है। जब तक अमेरिका और इजरायल ईरान के मिसाइल ठिकानों और लॉन्चिंग साइटों को पूरी तरह से निष्क्रिय नहीं कर देते, तब तक जवाबी कार्रवाई की संभावना बनी रहेगी। हालांकि, जमीनी हमला या ईरान पर सीधा कब्जा फिलहाल दूर की कौड़ी लगता है, क्योंकि ईरान का भूगोल, आबादी और सैन्य ढांचा किसी भी बाहरी ताकत के लिए एक लंबी और महंगी मुहिम साबित होगा।

राजनीतिक रूप से यह संकट दो संभावित रास्तों की ओर जा सकता है: या तो कट्टरपंथी गुट और मजबूत होकर प्रतिरोध की रणनीति को आगे बढ़ाएंगे, या फिर नेतृत्व परिवर्तन के बाद कोई नया संतुलन पैदा होगा जो सीमित समझौते या नए सिरे से बातचीत का रास्ता खोलेगा। ट्रंप प्रशासन द्वारा एक ही समय में सैन्य दबाव और कूटनीतिक संभावना का जिक्र इसी दोहरी रणनीति को दर्शाता है। ट्रंप का कहना है कि कल के मुकाबले आज राजनीतिक समाधान का रास्ता बहुत आसान हो गया है।

फिलहाल ईरान एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। नेतृत्व का खालीपन, आंतरिक सुरक्षा की चिंताएं, मिसाइल शक्ति पर निर्भरता और वैश्विक दबाव, ये सभी कारक मिलकर आने वाले दिनों को असाधारण रूप से महत्वपूर्ण बना रहे हैं। यदि राज्य का ढांचा व्यवस्थित तरीके से उत्तराधिकार के चरण को पार कर लेता है, तो व्यवस्था अपना अस्तित्व बनाए रख सकती है; लेकिन यदि आंतरिक कलह बढ़ती है, तो यह घटना मध्य पूर्व की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत भी साबित हो सकती है।

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कमाल है भाई!
लेख

कमाल है भाई!

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